ZINDA DIL

 जिंदा दिल

      -अंकुश 


वो जिना हि क्या जिना जिसमे दिल लगी ना हो ।

वो मरना भी क्या मरना जहा अश्रु का मोल ना हो ॥

सून ए राहगीर इस पथ पर ठोकरे तो मिलेगी बहुत 

मगर हर ठोकर मे जिंदगी जीने का होगा एक नया रंग ॥



रंगो के इस राह मे तु खुद रंग जाएगा ।

जिंदगी जीने का एक नया ढंग सिख जाएगा ॥

जब कभी  राह भटक जाए सुध बुध खो जाए  

रख विश्वाश क्यों की 

वो जिना हि क्या जिना जिस्मे रोनक-ए-नूर न हो ॥




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